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मानसिक नक्शा

१. आँधी के कारण व्यापार विभाग के सेक्रेटेरियट के लॉन में जामुन के पेड़ के गिरने से उसके नीचे ओस नामक साहित्यकार का दब जाना।

२. दबे हुए कवि को देख माली का चपरासी के पास, चपरासी का क्लर्क के पास, क्लर्क का सुपरिटेंडेंट के पास जाना।

३. व्यक्तिगत स्वार्थ तथा भ्रष्ट आचार के कारण निर्णय लेने की क्षमता का आभाव होना, जिसके परिणाम स्वरुप पेड़ को उठाकर ओस नामक साहित्यकार को बाहर निकालने से पहले सुपरिटेंडेंट का अंडर सेक्रेटरी से अनुमति लेने की बात कहना।

७. मगर तब-तक कवि की मृत्यु होना।

६. प्रधानमंत्री का अपने स्वार्थ के लिए इस घटना सारी की अन्तर्राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी अपने सिर लेना और पेड़ को काटने का हुक्म देना।

५. सरकारी विभागों की लापरवाही और ज़िम्मेदारी से मुँह मोड़ने की प्रवृत्ति का उजागर होना। किसी तरह की कार्य-शैली के अंर्तगत अनावश्यक नियमों का उल्लेख कर सभी विभागों का अपनी ज़िम्मेदारी एक-दूसरे पर थोप देना।

जामुन का पेड़

४. इसी कारण अनुमति प्राप्त करने का सिलसिला पहले महत्त्वपूर्ण पदों (अंडर सेक्रेटरी से डिप्टी सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी से ज्वाइंट सेक्रेटरी, ज्वाइंट सेक्रेटरी से चीफ सेक्रेटरी तथा चीफ से मिनिस्टर के पास) से होते हुए फिर सरकार के विभिन्न विभागों (व्यापार विभाग से कृषि विभाग,  कृषि विभाग से फिर व्यापार विभाग, व्यापार विभाग से हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट, हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से मेडिकल डिपार्टमेंट, मेडिकल डिपार्टमेंट से कल्चरल डिपार्टमेंट, कल्चरल डिपार्टमेंट से साहित्य अकादमी के सेक्रेटरी,  अकादमी के सेक्रेटरी से फॉरेस्ट डिपार्टमेंट) तक जाना, परंतु किसी का निर्णय न ले पाना।